आगरा उत्तर प्रदेश

योगी सरकार की मुहिम लाई रंग: आगरा में 36 हजार से अधिक महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’

  • स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं पौने दो लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं
  • ‘कृष्णा हर्बल’ की ममता की तरह कुटीर उद्योगों से आत्मनिर्भर बन रहीं दीदियां
  • कौशल विकास प्रशिक्षण से बदली ग्रामीण महिलाओं की तकदीर

आगरा (रोमा)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास अब जमीन पर रंग ला रहे हैं। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में आगरा जिले में अब तक 36,655 महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ के रूप में चिह्नित किया गया है, जो लघु और कुटीर उद्योगों के जरिए स्वावलंबन की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं पौने दो लाख महिलाएं
आगरा जिले में वर्तमान में करीब 1,73,324 ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुकी हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की इस मुहिम की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में 22,131 नई महिलाएं इस अभियान से जुड़ी हैं। प्रशासन द्वारा कई विकास खंडों में इन समूहों को आपस में मिलाकर संकुल (क्लस्टर) बनाए गए हैं, जिसके माध्यम से बड़े स्तर पर लघु उद्योगों का संचालन किया जा रहा है।

ममता की ‘कृष्णा हर्बल’ बनी सफलता की मिसाल
आगरा के विकासखंड सैंया क्षेत्र की ग्राम पंचायत ब्रिथला में संचालित ‘कृष्णा हर्बल’ लघु उद्योग समिति इसका जीवंत उदाहरण है। इस समिति की अध्यक्ष ममता आज जिले की प्रमुख लखपति दीदियों में से एक हैं। उनकी यह समिति साबुन, हैंडवॉश, डिटर्जेंट पाउडर और टॉयलेट क्लीनर जैसे घरेलू उत्पादों का निर्माण करती है, जिनकी सप्लाई आगरा के कई क्षेत्रों में हो रही है। ममता की तरह ही हजारों महिलाएं अब घरेलू और कुटीर उद्योग संभालकर अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं।

कौशल विकास से ग्रामीण महिलाओं की बदली तकदीर
उपायुक्त स्वतः (रोजगार) रामायण सिंह यादव ने योजना की सफलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए उन्हें कौशल विकास के विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण प्रदान किए जाते हैं। हमारा उद्देश्य उन्हें सिर्फ महिलाओं को समूह से जोड़ना नहीं, बल्कि विभिन्न तरह के घरेलू, कुटीर और लघु उद्योगों के माध्यम से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है। आगरा जिले में वर्तमान समय में समूहों से जुड़ी 36,655 महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ के रूप में चिह्नित किया जा चुका है, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

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