आगरा उत्तर प्रदेश धर्म

आगरा में हरियाली तीज पर दिखा अनोखा श्रृंगार: खाटू श्याम और प्रेम निधि मंदिर में भक्तों ने मनाए प्रेम और प्रकृति के उत्सव  

  • इलायची और कीवी से सजे खाटू श्याम, पहली बार हुआ ऐसा अद्भुत श्रृंगार
  • पुष्टिमार्गीय परंपरा से प्रेम निधि मंदिर में झूले पर विराजे ठाकुर श्याम बिहारी
  • भक्तिमय वातावरण में गूंजे भजन, श्रद्धालुओं में दिखा अपार उत्साह

आगरा (रोमा)। हरियाली तीज का पावन पर्व आगरा में भक्ति, प्रकृति और नवाचार के संगम के रूप में मनाया गया। शहर के श्री खाटू श्याम जी मंदिर, जीवनी मंडी और श्री प्रेमनिधि जी मंदिर, नाई की मंडी, दोनों जगह श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा, जिन्होंने भगवान के अनोखे स्वरूपों के दर्शन कर खुद को धन्य महसूस किया।

खाटू श्याम जी का अद्भुत ‘फ्रूट’ श्रृंगार

श्री खाटू श्याम जी मंदिर में हरियाली तीज पर भगवान का अत्यंत अनोखा और आकर्षक श्रृंगार किया गया। इस विशेष अवसर पर पहली बार इलायची और कीवी जैसे सुगंधित फलों से भगवान का श्रृंगार हुआ, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस विशिष्ट सेवा का सौभाग्य यश अग्रवाल और अजय गर्ग (आवागढ़) को प्राप्त हुआ। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष दिनेश अग्रवाल ने कहा कि यह नवाचार भक्तों को भगवान से जुड़ने का एक नया माध्यम है। वहीं, संजय अग्रवाल ने इसे पर्यावरण के प्रति आस्था और भक्ति में ताजगी का प्रतीक बताया। संध्या आरती के बाद सावन की मल्हार से सजे भजनों का भक्तों ने खूब आनंद लिया।

प्रेमनिधि मंदिर में पुष्टिमार्गीय परंपरा का हिंडोला

वहीं, श्रावण शुक्ल तृतीया पर नाई की मंडी स्थित प्राचीन श्री प्रेमनिधि जी मंदिर में पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार हरियाली तीज मनोरथ हर्षोल्लास से मनाया गया। इस पावन अवसर पर ठाकुर श्याम बिहारी जी को हरे-भरे वस्त्रों और पुष्पों से सजे भव्य हिंडोले में विराजमान किया गया। भक्तों ने प्रेमपूर्वक भगवान को झूला झुलाया और भक्ति रस में डूबे भजन-कीर्तन में भाग लिया।

मंदिर परिसर में भव्य सजावट, प्रेम और प्रकृति का संगम

मंदिर परिसर को हरे-भरे पुष्पों, तोरण और बंदनवार से भव्य रूप से सजाया गया था। फूलों के मंडप में विराजमान ठाकुर जी के दर्शन कर श्रद्धालु अभिभूत हो उठे। मुख्य सेवायत हरिमोहन गोस्वामी एवं सुनीत गोस्वामी ने बताया कि पुष्टिमार्ग में हरियाली तीज को “ठकुरानी तीज” कहा जाता है, जो राधा रानी और श्रीकृष्ण के मिलन और प्रेम का प्रतीक है। यह उत्सव केवल परंपरा नहीं, बल्कि ठाकुर जी के प्रति प्रेम और समर्पण को जीवंत करने का एक माध्यम है, जो प्रकृति, भक्ति और सौंदर्य का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

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