आगरा उत्तर प्रदेश

चीनी कंपनी के हाथ से फिसला कानपुर-आगरा मेट्रो प्रॉजेक्ट, अब बॉम्बार्डियर इंडिया कंपनी करेगी मेट्रो ट्रेनों की सप्लाई

लखनऊ: पूर्वी लद्दाख की एलएसी पर चीन से जारी तनाव के बीच भारत ने चीन को एक और झटका दिया है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) ने कानपुर और आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए चीन की कंपनी को अयोग्य माना है। मेट्रो ट्रेन बनाने का ठेका कनाडा की बॉम्बार्डियर इंडिया कंपनी को दिया गया है। ये कंपनी गुजरात स्थित प्लांट से आगरा और कानपुर मेट्रो ट्रेनों की सप्लाई की जाएगी। इससे ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम को मजबूती देगी।

कानपुर और आगरा दोनों ही मेट्रो परियोजनाओं में 67 ट्रेनों की सप्लाई होगी। इसके प्रत्येक ट्रेन में तीन कोच होंगे। 67 ट्रेनों में से 39 ट्रेनें कानपुर और 28 ट्रेनें आगरा के लिए होंगी। एक ट्रेन की यात्री क्षमता लगभग 980 होगी। यानी प्रत्येक कोच में लगभग 315-350 लोग यात्रा कर सकेंगे।
  
रोलिंग स्टॉक्स और सिग्नलिंग सिस्टम के लिए इंटरनेशनल बिडिंग की गई थी, जिसमें चार अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने हिस्सा लिया। बिड में शामिल चीनी कंपनी को अयोग्य घोषित कर दिया गया।

बता दें कि योगी सरकार ने आगरा में 2021 तक मेट्रो चलाने का वादा किया है। इसके यार्ड के लिए फतेहाबाद रोड पर जमीन चिन्हित की गई है। शहर में दो रूट पर मेट्रो चलेगी। दोनों तय किए जा चुके हैं। कानपुर और आगरा में पहले मेट्रो ट्रेन सेट की सप्लाई के लिए 65 हफ्तों की समय-सीमा तय की गई है। यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने बताया कि कानपुर और आगरा के लिए प्रस्तावित मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम में मेट्रो की स्पीड 80 किमी./घंटा निर्धारित की गई है, जबकि मेट्रो ट्रेनों की अधिकतम क्षमता 90 किमी./घंटा होगी। ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (सीएटीएस) होगा।

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